Wednesday, 21 June 2023

अगर आप

अगर आप 
बौद्धिक, 
तार्किक,
मनोवैज्ञानिक, 
सृजनात्मक
व संवेदनशील व्यक्तित्व रखते है.. 
तो जीवन आसान नहीं होगा आपका..
क्योंकि इनमें से एक भी योग्यता 
हमारा वर्तमान समाज नहीं रखता...।


Wednesday, 12 April 2023

मां

मां.. 

वह जो हमें इस दुनिया में 

एक बार लाती है...

मगर

जीवन हमें कई बार देती है... 

जब भी 

हम टूटते-बिखरते हैं...

वह अपनी पूरी जीवन ऊर्जा लगाकर 

हमें फिर से पुनर्जीवित कर देती है.....।

Friday, 13 January 2023

कभी-कभी

 कभी-कभी जिंदगी में

 भागते रहने से ज्यादा

 ठहर जाना बेहतर होता है...

और वो जो कभी

हमारी प्राथमिकता में

सबसे पहला स्थान रखता था...

उसे लिस्ट से ही

बाहर कर देना जरूरी होता है

जिंदगी में सुकूं के लिए....।

Sunday, 13 November 2022

बिना उसकी जिंदगी जिए

फिंगरप्रिंट की तरह ही

कोई भी दो जिन्दगियों की कहानी

मैैच नहीं करती..

तो कैसे हम किसी और को

जज कर सकते हैं..

बिना उसकी जिंदगी जिए....।

Sunday, 2 October 2022

बढ़ती उम्र के साथ

बढ़ती उम्र के साथ 
हम जजमेंटल कम.. 
और सेनसिबल 
अधिक हो जाते है...
जीवन को 
बिताना कम..
और जीना अधिक 
सीख जाते है...
अदब के नाम पर 
जीवन मे घुली
गुलामी से..
कुछ आजाद होना 
सीख जाते है...
हजारों बंदिशों की
गठरी की गांठों को...
हौले-हौले 
खोलना सीख जाते है....।


Monday, 15 August 2022

सवाल

आज किसी ने पूछा उम्र क्या हो गई मैम आपकी 

जिसने पूछा उसे जन्मदिन से लेकर साल तक पता था..

कितना स्तरीय सवाल था ना....

ऐसे ही कुछ और स्तरीय सवाल पूछे गए..

तुम जैसे लोगों के दिमाग में 

कभी यह सवाल क्यों नहीं उठते कि

किस तरह रोक सकते हैं

मासूम बच्चों को यौन हिंसा से..

किस तरह दे सकते हैं किसी के जीवन को दिशा..

तुम्हारे ही घरों में तुम्हारे ही रिश्तेदार

तुम्हारे ही बच्चों का जीवन नोंच लेते हैं

तब तुम खामोश रहते हो..

उस बच्चे को भी चुप रहना सिखाते हो 

तब तुम सवाल नहीं करते

तब तुम खड़े नहीं होते 

क्योंकि तुम सब सभ्य समाज का हिस्सा जो ठहरे..

सामने सब ठीक लगना चाहिए

भीतर चाहे कोई खत्म हो जाए..

अपने शब्द.. अपनी उर्जा.. अपने जीवन को..

सही दिशा में लगाना सीखो

ताकि कुछ मायने हो तुम्हारे जीवन के....।




  

Wednesday, 6 July 2022

किशोरावस्था

किशोरावस्था
जीवन की आधारशिला है...
और यौन परिपक्वता
अपराध नहीं 
विकास की प्रकिया है...
किशोरों को 
जीवन के जिस बेहद 
महत्वपूर्ण पड़ाव पर... 
हमारी सबसे ज्यादा 
जरूरत होती है... 
तब परिवार और समाज
उनका मार्गदर्शन करने की बजाय 
उन्हें जज करने बैठ जाता है...
और किशोर अकेले ही
इस दौर से जूझते रहते हैं...
किशोरावस्था निर्माण का समय है 
किशोरों के जीवन में नींव बनिए.. 
किशोरावस्था में किशोरों को 
तन्हा, खुद में ही उलझा हुआ 
और विध्वंसक बनने के लिए मत छोड़िए.....l