The Beginning
Thursday, 17 September 2020
मृत रूहें
जीते कहां हैं हम
हमें तो रोज मरने की
कला सिखाई जाती है..
मौत बेचारी तो
बड़ा उपकार करती है
हम 'मृत रूहों' पर..
कि आजाद कर देती है हमें
'ज़िस्मों की कैद' से...।
No comments:
Post a Comment
Newer Post
Older Post
Home
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
No comments:
Post a Comment