तुझे आदत है
तुझे आदत है
अपनी हर ख्वाहिश को
अपने ही सीने में दफ्न करने की....
तो फिर सुकूं भला
मेरे हिस्से आता कैसें
मैं भी तो तुम्हारी ख्वाहिश ठहरी.......
तुझे आदत है
अपनी हर ख्वाहिश को
अपने ही सीने में दफ्न करने की...
मगर आदत ही तो है...
और आदतें तो बदली भी जा सकती है...है ना...।
Touching words
ReplyDelete