Monday, 2 June 2025

तमाचा

कुछ साल पहले एक आदमी ने प्यार का झूठा खेल खेलने के बाद कहा था..
"मैं आदमी हूं मेरा कुछ नहीं बिगड़ेगा।" 
अभी फिर एक दूसरे ने कहा..
"हम आदमियों की जात ही ऐसी है.. एक से शादी 10 से चक्कर।"
क्या सच में इस निर्लज्जता, दुस्साहस और अहंकार का संबंध पुरुष होने से है...
या समाज के मुँह पर तमाचा है.. ये वक्तव्य...
उसकी दी गई खुली छूट के जवाब में....।

Friday, 7 February 2025

गायत्री

गायत्री सब जानती है..
फिर भी वह, वह स्त्री है..
जो पुरुष-सत्ता को पोसती है, सींचती है,
उसे फलने-फूलने में नींव का काम करती है..
और इस नींव पर खड़े पुरुष,
अहंकार और निर्लज्जता के साथ
दूसरी स्त्रियों के जीवन के साथ खेलते हैं..
गायत्री प्रतीक है उन स्त्रियों का..
जो पत्नी के रूप में पुरुष को प्रेम देती है,
उसकी हर तरीके से देखभाल करती है,
खेत, घर, गाय-भैंस सब संभालती है,
और आजकल तो नौकरी भी करती है...
जीवन-निर्माण की सभी खूबियां होने के बावजूद भी
अपने अय्याश पति को कुछ नहीं कहती है.. 
कोई मजबूत फैसला नहीं लेती है.. 
और गायत्री जैसी स्त्रियों की मूर्खता की कीमत, 
दूसरी मासूम स्त्रियों को चुकानी पड़ती है..
क्योंकि इन स्त्रियों से पोषित पुरुष
दूसरी स्त्रियों के जीवन को नोचते हैं...
क्या इसी दिन के लिए
ज्योतिबा फुले और सावित्रीबाई फुले ने
महिलाओं को शिक्षित करने का फैसला लिया था..
कि शिक्षित और नौकरी-पेशा महिलाएं भी पुरुष-सत्ता को ही सींचती रहे?

Wednesday, 3 July 2024

खुद से प्यार करना


खुद से प्यार करना
और सिर्फ खुद से ही प्यार करना 
दोनों कितने विपरीत है एक दूसरे से... 
कोई खुद से प्यार करता है 
ताकि लुटा सके पूरी दुनिया पर प्यार...
और दूसरी तरफ 
सिर्फ खुद से ही प्यार करने वाले लोग 
जो निचोड़ लेना चाहते है पूरी दुनिया को
अपने निजी स्वार्थ के लिए...
खुद से प्यार करने वाले दो लोग 
कितने अलग हो सकते है ना....

Tuesday, 7 November 2023

यादें कितना सुकूं देती है ना..
बशर्ते वो खूबसूरत हो....।

Thursday, 28 September 2023

सिर्फ मातृत्व

पहली बार जब

अपनी नन्हीं-सी भांजी को गोद में लिया

फिर महीने-भर उसके साथ रही

उसे खिलाना-पिलाना लोरी गाकर सुलाना 

उसकी तबीयत खराब हो जाने पर बेचैन हो उठना

सब आदत बन गए..  

एक बार उसे नहलाते हुए 

उसके कोमल-से गाल को 

जब मेरा नाखून छू गया

और वो रोने लगी..

तो उस दिन

उस वक़्त की मेरी सबसे अजीज चीज 

मेरे लंबे और खूबसूरत नाखूनों को

मैंने बिना सोचे और बिना किसी पीड़ा के

उसी वक़्त काट दिया... 

वो बच्ची, उसकी मुस्कराहट, उसका सुकून 

अब मेरे लिए सर्वोपरि हो चुका था....

ऐसा फिर हुआ,

जब मैं किसी पुरुष के प्रेम में पड़ी... 

शायद,

हम स्त्रियों के पास सिर्फ मातृत्व होता है... ।

Thursday, 20 July 2023

स्वास्थ्य

जानते हो

जिंदगी में सबसे महत्वपूर्ण क्या है?

हमारा स्वास्थ्य.... 

स्वास्थ्य का मतलब सिर्फ शारीरिक स्वास्थ्य नहीं,

मानसिक स्वास्थ्य भी है...

स्वास्थ्य में यह दोनों आते हैं...

शरीर के बारे में बहुत चर्चा हुई है 

इसलिए कुछ हद तक हम इसे समझते हैं..

मगर इसे भी पूरी तरह हम नहीं समझते 

पीरियड्स, सेक्स, प्यार और कॅरियर के दबाव जैसे जरूरी 

विषयों पर खुलकर बात नहीं की जाती है 

और जब हम खुलकर अपनी बातें नहीं रख पाते.. 

या कहने, पूछने पर भी 

हमारे बड़े अपनी समझ की कमी 

या झूठी शर्म के कारण 

हमसे इन मुद्दों पर बात नहीं करते है.. 

तब बात मानसिक स्वास्थ्य पर आ जाती है...

जरूरी है की बिना शर्माये 

इन जरूरी मुद्दों पर बात की जाये..

ताकि जीवन बचाएँ जा सके...।  




कन्यादान

कन्यादान प्रथा नहीं 
कुप्रथा है..
जैसे सती-प्रथा,
बाल-विवाह आदि.. 
क्योंकि दान पर हमारा 
किसी भी प्रकार का 
कोई भी अधिकार नहीं रह जाता.....
दान की तो यही परिभाषा है..
इसलिए कन्यादान प्रथा नहीं
कुप्रथा है...
अपनी ही बेटी पर 
अपने सारे अधिकार खो देना
कैसा महादान है.....
हाँ.. यह अपनी बेटी के प्रति 
अपनी जिम्मेदारियों से भागने 
का ज़रिया जरूर है....
इसलिए कन्यादान प्रथा नहीं
कुप्रथा है............।