कहाँ बदलता है
कुछ भी खुद-ब-खुद
ये हमी तो हैं
जो भर के मन की ताकत से
उठातें हैं जब हाथ अपनें..
तो बदल जाती है तस्वीर दुनिया की
पलट जाते हैं तख़्त बादशाहों तक के....
सही भी है
गर बिना कूँची उठायें
तस्वीर में रंगों के भर जाने का इंतजार हम करते रहें
तो तस्वीर हमेशा के लिए बेरंग ही रह जायेंगी
और जो गर उठा ली कूँची हमनें....
तो फिर तस्वीर का हर रंग
हमारें मनमाफिक होगा............।
कुछ भी खुद-ब-खुद
ये हमी तो हैं
जो भर के मन की ताकत से
उठातें हैं जब हाथ अपनें..
तो बदल जाती है तस्वीर दुनिया की
पलट जाते हैं तख़्त बादशाहों तक के....
सही भी है
गर बिना कूँची उठायें
तस्वीर में रंगों के भर जाने का इंतजार हम करते रहें
तो तस्वीर हमेशा के लिए बेरंग ही रह जायेंगी
और जो गर उठा ली कूँची हमनें....
तो फिर तस्वीर का हर रंग
हमारें मनमाफिक होगा............।
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