लगता है जैसे तू और मैं
एक ही लड़की के इश्क़ में है
जिसने खो दिया है
दुनिया की भीड़ में खुद को...
उससे फिर से मिलना चाहती हूं मैं
और शायद तू भी...
उस नटखट-सी
अपनों की परवाह करने वाली..
छोटी-छोटी चीजों में
खुशी ढूंढ लेने वाली लड़की से
मेरी तरह.. तुझे भी इश्क़ है शायद...
मगर पता नहीं
उसकी मासूमियत
उसकी बेफ़िक्री
फिर से लौट पाएंगी या नहीं...
वो सुनसान अंधेरे रास्तों पर
पथ-प्रदर्शक बनी
'रोड लाइट-सी लड़की'
हम दोनों को मिल पाएंगी या नहीं.. ।
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