Sunday, 4 October 2020

सागर का किनारा

सागर का किनारा हो,

और ढ़लते सूरज की खूबसूरती के साक्षी हम हो..

हाथों में हमारे जाम,

और गालों पर इन्द्रधनुष के रंग हो..

कांधे पर तुम्हारे मेरा सर हो,

और हमारी मुहब्बत के रंगों से सजी कविता

गुनगुनाती हुई उस पल वहां मैं हो..

और शामिल उस पल में हर वो बात हो,

जो बना दे हमें रूहों के साथी.. ताउम्र के लिए....।

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