Tuesday, 27 October 2020

मौजूदगी

सांसों में

जिंदा होने का एहसास

भरती थी शायद...

मौजूदगी एक दूजें की...

बस इसीलिए

जरूरी है शायद...

आज भी हमें

इस जहां में..

मौजूदगी एक दूजें की...।

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