नीम
तुम्हारी शाखाओं को काटा गया
नहीं..
तुम्हें जड़ से नष्ट किया गया...
बिछा दी गई टाइल्स
मंदिर के हर कोने में
मंदिर को भव्य बनाने के लिए...
उस रोज तुम्हारी ही छांव तले
करने को फैसला तुम्हारा
कुछ प्रबुद्ध जन बैठे थे...
और फैसला
तुम्हारे विपक्ष में आया था.....।
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