स्वीकारना जो सीख लेते हो
कितना कम है
जीवन में चुनने के लिए..
और कितना अधिक है
जीने के लिए...
चुनने की स्वतंत्रता
हमें हर बार नहीं होती
लेकिन जीने की होती है...
क्योंकि समझ लो जीवन को
तो टकराना छोड़ देते हो...
जीवन को उसके सहज भाव से
स्वीकारना जो सीख लेते हो...।
No comments:
Post a Comment