Monday, 30 May 2022
Thursday, 19 May 2022
प्रकृति
फूलों के रंग
कहां फूलों तक रहते हैं..
बिखर जाते हैं
अपनी महक के साथ..
एक नजर ठहरकर
दीदार कर लेने वाले के.. रुखसारों पर
महकते गुलाल की तरह......।
चांदनी आसमान में चांद की
सब तरफ फैली तो होती है..
मगर नहाता उसमें
कोई-कोई शख़्स ही है..
रुककर दो पल सुकूं से निहारती है
जब कोई नजर चांद को..
तो साथ ही उतर आती है
चांदनी भी भिगोने उसे..
और जब चांदनी में भीगकर
चहकती है कोई रुह तो..
उस पल खिल उठता होगा चांद भी...
जैसे पानी में भीगते-चहकते
अपने बच्चे को देखकर
खिल उठती है..कोई मां.....।
पत्तों से बिखरकर
यूं तो हरियाली कहीं नहीं जाती..
मगर दिन-रात की दौड़ती-भागती जिंदगी
ज्यों ही ठहर जाती है..
पेड़ों की लहराती शाखों के
मचलते पत्तों पर..
तो आंखों से होकर हरियाली
दिल के मैदानों तक दौड़ जाती है...
Monday, 9 May 2022
बसकर
दो साल पहले
'बसकन्या' नाम की बच्ची से मिली थी
और आज 'बसकर' से मिलना हुआ..
ये बच्चियां क्या बस करे
अब आप लोग बस कीजिए..
इन मासूम बच्चियों को
इतने स्तरहीन नाम देना....
नाम किसी भी व्यक्ति की पहचान होती है
तो कुछ सुंदर और स्तरीय नाम दीजिए
अपनी विकृत मानसिकता को पीछे छोड़कर.....।
Saturday, 7 May 2022
विटामिन-D
विटामिन-D उसके लिए नहीं है
खुले में वह अपने बाल नहीं सुखा सकती
भले ही सर्दी-जुकाम उसे जकड़ ले....
ठिठुराती सर्दी में भी
अगर वह छत पर जाकर धूप में अपने बाल सुखा आए
और किसी पड़ोसी की नजर उस पर पड़ जाए
तो यह उसके स्वास्थ्य से ज्यादा
उसके चरित्र का मुद्दा हो जाएगा....
चाहे उसके घुटनों के दर्द के लिए
बताया हो डॉक्टर ने
थोड़ी देर तेल लगाकर धूप में बैठना..
लेकिन विटामिन-D उसके लिए नहीं है
क्योंकि... वह किसी के घर की बहू है.....।
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