Monday, 30 May 2022

पारस पत्थर

'पारस पत्थर'

बचपन में सुना था इसके बारे में..

पुरानी प्रचलित मान्यता है

कि जो कोई धातु इस पत्थर को छुआ दे

वो सोना हो जाए..

मगर इस पत्थर का

इस दुनिया में कहीं कोई अस्तित्व नहीं..

शायद प्रतीक है

ये उन लोगो का...

जिनके खुद के जीवन बड़े पथरीले-से रहे हैं..

मगर दूसरो की जिंदगियों को

सोने-सा उज्ज्वल बनाने की

योग्यता और सामर्थ्य वो पा चुके है...

क्योंकि गुजरे हैं वो

जीवन के पथरीले रास्तों से..

गहनतम दर्द,

गहनतम पीड़ा,

गहनतम आनंद से,

जीवन के हर गहनतम अनुभव से...

और बन गए हैं 'पारस पत्थर'....।

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