Sunday, 2 October 2022

बढ़ती उम्र के साथ

बढ़ती उम्र के साथ 
हम जजमेंटल कम.. 
और सेनसिबल 
अधिक हो जाते है...
जीवन को 
बिताना कम..
और जीना अधिक 
सीख जाते है...
अदब के नाम पर 
जीवन मे घुली
गुलामी से..
कुछ आजाद होना 
सीख जाते है...
हजारों बंदिशों की
गठरी की गांठों को...
हौले-हौले 
खोलना सीख जाते है....।


Monday, 15 August 2022

सवाल

आज किसी ने पूछा उम्र क्या हो गई मैम आपकी 

जिसने पूछा उसे जन्मदिन से लेकर साल तक पता था..

कितना स्तरीय सवाल था ना....

ऐसे ही कुछ और स्तरीय सवाल पूछे गए..

तुम जैसे लोगों के दिमाग में 

कभी यह सवाल क्यों नहीं उठते कि

किस तरह रोक सकते हैं

मासूम बच्चों को यौन हिंसा से..

किस तरह दे सकते हैं किसी के जीवन को दिशा..

तुम्हारे ही घरों में तुम्हारे ही रिश्तेदार

तुम्हारे ही बच्चों का जीवन नोंच लेते हैं

तब तुम खामोश रहते हो..

उस बच्चे को भी चुप रहना सिखाते हो 

तब तुम सवाल नहीं करते

तब तुम खड़े नहीं होते 

क्योंकि तुम सब सभ्य समाज का हिस्सा जो ठहरे..

सामने सब ठीक लगना चाहिए

भीतर चाहे कोई खत्म हो जाए..

अपने शब्द.. अपनी उर्जा.. अपने जीवन को..

सही दिशा में लगाना सीखो

ताकि कुछ मायने हो तुम्हारे जीवन के....।




  

Wednesday, 6 July 2022

किशोरावस्था

किशोरावस्था
जीवन की आधारशिला है...
और यौन परिपक्वता
अपराध नहीं 
विकास की प्रकिया है...
किशोरों को 
जीवन के जिस बेहद 
महत्वपूर्ण पड़ाव पर... 
हमारी सबसे ज्यादा 
जरूरत होती है... 
तब परिवार और समाज
उनका मार्गदर्शन करने की बजाय 
उन्हें जज करने बैठ जाता है...
और किशोर अकेले ही
इस दौर से जूझते रहते हैं...
किशोरावस्था निर्माण का समय है 
किशोरों के जीवन में नींव बनिए.. 
किशोरावस्था में किशोरों को 
तन्हा, खुद में ही उलझा हुआ 
और विध्वंसक बनने के लिए मत छोड़िए.....l

Monday, 30 May 2022

पारस पत्थर

'पारस पत्थर'

बचपन में सुना था इसके बारे में..

पुरानी प्रचलित मान्यता है

कि जो कोई धातु इस पत्थर को छुआ दे

वो सोना हो जाए..

मगर इस पत्थर का

इस दुनिया में कहीं कोई अस्तित्व नहीं..

शायद प्रतीक है

ये उन लोगो का...

जिनके खुद के जीवन बड़े पथरीले-से रहे हैं..

मगर दूसरो की जिंदगियों को

सोने-सा उज्ज्वल बनाने की

योग्यता और सामर्थ्य वो पा चुके है...

क्योंकि गुजरे हैं वो

जीवन के पथरीले रास्तों से..

गहनतम दर्द,

गहनतम पीड़ा,

गहनतम आनंद से,

जीवन के हर गहनतम अनुभव से...

और बन गए हैं 'पारस पत्थर'....।

Thursday, 19 May 2022

प्रकृति

फूलों के रंग
कहां फूलों तक रहते हैं..
बिखर जाते हैं
अपनी महक के साथ..
एक नजर ठहरकर 
दीदार कर लेने वाले के.. रुखसारों पर
महकते गुलाल की तरह......।

चांदनी आसमान में चांद की
सब तरफ फैली तो होती है..
मगर नहाता उसमें 
कोई-कोई शख़्स ही है.. 
रुककर दो पल सुकूं से निहारती है
जब कोई नजर चांद को..
तो साथ ही उतर आती है 
चांदनी भी भिगोने उसे..
और जब चांदनी में भीगकर 
चहकती है कोई रुह तो..
उस पल खिल उठता होगा चांद भी...
जैसे पानी में भीगते-चहकते 
अपने बच्चे को देखकर
खिल उठती है..कोई मां.....।

पत्तों से बिखरकर 
यूं तो हरियाली कहीं नहीं जाती..
मगर दिन-रात की दौड़ती-भागती जिंदगी 
ज्यों ही ठहर जाती है..
पेड़ों की लहराती शाखों के
मचलते पत्तों पर..
तो आंखों से‌ होकर हरियाली
दिल के मैदानों तक दौड़ जाती है...

Monday, 9 May 2022

बसकर

दो साल पहले

'बसकन्या' नाम की बच्ची से मिली थी

और आज 'बसकर' से मिलना हुआ..

ये बच्चियां क्या बस करे

अब आप लोग बस कीजिए..

इन मासूम बच्चियों को 

इतने स्तरहीन नाम देना....

नाम किसी भी व्यक्ति की पहचान होती है

तो कुछ सुंदर और स्तरीय नाम दीजिए

अपनी विकृत मानसिकता को पीछे छोड़कर.....।

Saturday, 7 May 2022

विटामिन-D

विटामिन-D उसके लिए नहीं है
खुले में वह अपने बाल नहीं सुखा सकती 
भले ही सर्दी-जुकाम उसे जकड़ ले....

ठिठुराती सर्दी में भी 
अगर वह छत पर जाकर धूप में अपने बाल सुखा आए
और किसी पड़ोसी की नजर उस पर पड़ जाए 
तो यह उसके स्वास्थ्य से ज्यादा 
उसके चरित्र का मुद्दा हो जाएगा....

चाहे उसके घुटनों के दर्द के लिए 
बताया हो डॉक्टर ने
थोड़ी देर तेल लगाकर धूप में बैठना..
लेकिन विटामिन-D उसके लिए नहीं है  
क्योंकि... वह किसी के घर की बहू है.....।