हर रोज़ अपनी नज़रों से
चुपके-से..
मेरी नजर उतारना तेरा....
हर बार...
तेरे मासूम से चेहरे का
मुड़ जाना मेरी तरफ
सूरजमुखी की तरहा.....
कैसे भूलूं.. तुम ही बता दो.....।
खनखनाती-सी तुम्हारी आवाज
जिसे सुनने को
खनखनाती-सी तुम्हारी आवाज
जिसे सुनने को
दिल हमेशा ही प्यासा बैठा हो...
रूह का हर कोना
जगमग कर जाती थी जो
वो जुगनुओं-सी
वो जुगनुओं-सी
चमकती तुम्हारी आंखें..
कैसे भूलूं.. तुम ही बता दो.....।
ज्यादा तो नहीं जानती
कैसे भूलूं.. तुम ही बता दो.....।
ज्यादा तो नहीं जानती
इश्क़ के बारे में
मगर तेरे साथ से
मगर तेरे साथ से
जो सुकूं रहा है जिंदगी में...
उस सुकूं और
उस सुकूं और
धड़कती हुई जिंदगी को..
कैसे भूलूं.. तुम ही बता दो.....।
कैसे भूलूं.. तुम ही बता दो.....।
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