Monday, 4 May 2020

तुम ही बता दो..


हर रोज़ अपनी नज़रों से
चुपके-से..
मेरी नजर उतारना तेरा....
हर बार...
तेरे मासूम से चेहरे का
मुड़ जाना मेरी तरफ
सूरजमुखी की तरहा.....
कैसे भूलूं.. तुम ही बता दो.....।

खनखनाती-सी तुम्हारी आवाज
जिसे सुनने को 
दिल हमेशा ही प्यासा बैठा हो...
रूह का हर कोना
जगमग कर जाती थी जो
वो जुगनुओं-सी
चमकती तुम्हारी आंखें..
कैसे भूलूं.. तुम ही बता दो.....।

ज्यादा तो नहीं जानती
इश्क़ के बारे में
मगर तेरे साथ से
जो सुकूं रहा है जिंदगी में...
उस सुकूं और
धड़कती हुई जिंदगी को..
कैसे भूलूं.. तुम ही बता दो.....।

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