उस दोगले समाज को दुर्गा अष्टमी की हार्दिक शुभकामनाएं .....जो अभिनय तो स्त्री को देवी मानने का करता है और ..... जिसके लगभग हर घर, हर गली, हर बस्ती, हर चौराहे पर..... गूंजता रहता है दम्भ से भरा बस एक ही स्वर.... मैं पुरुष हूं..... मैं पुरुष हूं........
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