Thursday, 7 May 2020

नि:शब्द...

नि:शब्द तुम..
नि:शब्द हम..
संवाद जारी है मगर....
राग सारे प्रेम के
छू रहे हैं अंतर्मन..
इक कश्ती पर सवार
बहे जा रहे है
रुख हवाओं के देखते से..
नि:शब्द तुम..
नि:शब्द हम..
संवाद जारी है मगर....।


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