Saturday, 23 May 2020

आत्महत्या (सामाजिक-हत्या)

'आत्महत्या' क्षणिक आवेग नहीं
घुटन है, एक लम्बे-चौडे़ वक्त की..
कोशिश है, सामने खडी़
बद्शक्ल जिंदगी से आजादी की..।

कहानी है शायद उस वक्त की
जब स्वीकार नहीं पाता होगा कोई शख़्स
सामने खडी़ उस बद्सूरत जिंदगी को
जिसकी खूबसूरती के सपनें उसने सजाये थे..।

उठ जाता होगा विश्वास ,
जब हर रिश्तें से...
छूट जाता होगा मोह,
जब अपने से जुडे़ हर शख़्स से...
और जब नजर आता होगा हर तरफ
सिर्फ अँधेरा,
अविश्वास,
नफरत,
धोखें और चालबाजियाँ
और मुश्किल हो जाता होगा जब
इन सबसे उपजी घुटन और दर्द को बर्दाश्त कर पाना..
और जब लाख कोशिशों के बाद भी
नजर ना आती होगी एक किरण रोशनी की..
शायद तभी, खुद की दर्द से तड़पती
रूह के सुकूं के लिए
खुद और दुनिया से बेहद प्रेम करने वाला एक शख़्स,
चुन लेता होगा वो राह..
दुनिया जिसे,
'आत्महत्या' कहती है........

ना जाने कितने हाथ रंगें होंगे
उस एक मासूम के खून में..
मगर कठघरे में खडा़.. सिर्फ वही मिलेगा......।

                                   

4 comments: