Wednesday, 10 June 2020

जुगनुओं से भरी रात से..

नज़रों में
ठहर जाने वाली..
जुगनुओं से भरी
रात से.....
तुम मुझसे
जब भी मिलें हो..
भर गए हो.....
मेरे अस्तित्व के
हर कोनें को..
'संपूर्णता' से....।

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