किसी चीज को नकारना
सिर्फ नकारना नहीं होता..
स्वीकारना होता है.. स्वयं के वजूद को....
हर बार हां में सर तो
सिर्फ कोई गुलाम ही हिला सकता है .....।
हर बार हां में सर तो
सिर्फ कोई गुलाम ही हिला सकता है .....।
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