जाति और धर्म के नाम पर
कितने ही योग्य लोगों को..
कितने ही योग्य लोगों को..
बांध दिया जाता है
अयोग्य लोगों के पल्लें...
और नष्ट हो जाती है एक दिन
उनके भीतर की सारी योग्यता..
उन अयोग्य साथियों के संग
सिर पचाते-पचाते..
सिर पचाते-पचाते..
जो कभी बहा करते थे
नदियों की तरह..
सूख जाती है..
नदियों की तरह..
सूख जाती है..
उनके भीतर की नदी
और उसका कलनाद..
और उसका कलनाद..
और बचते है तो बस
सूखी नदी के से अवशेष..
सूखी नदी के से अवशेष..
कितना भारी नुकसान करते है हम
देश और समाज का
देश और समाज का
जाति और धर्म के नाम पर....।
No comments:
Post a Comment